
एक अनपढ़ और बुढ़ी महिला जिनके पास कमाने का कोई जरिया नहीं होता इनके 5 बच्चे
दोनों ल़डकियों की शादी हो चुकी और बेटे अपने परिवार मे मस्त हो गए
छोटी छोटी जरूरत के लिए दूसरे का मुह देखना पड़ता अब तो सब इनसे बात करने से भी कतराते थे
इनके बेटे इनको खाना देने से भी परहेज करने लगे
लेकिन इन्होंने हिम्मत नहीं हारी
इन्होंने कुछ पैसों से कुछ भुट्टे खरीद लिये एक चूल्हा जो इनके घर मे रखा था उसमे कोयला डाल कर जला लिया और भुट्टे भून भून कर आज 5 सालों से बेंच रही हैं इनके भुट्टे हम लोग भी खाते हैं पूरा मुहल्ला खरीद कर खाता है इनको अच्छा मुनाफा होता है अपने छोटे से घर मे अकेली रहती है और सुबह शाम नियम से बिना आलस्य के भुट्टे बेंचने आ जाती हैं
इनका गुज़ारा भी हो जाता है और सबकी मदद भी मिलती हैं रोज पुलिस वाले इनका भुट्टा खाते हैं
अगर कोई कुछ करना चाहें तो कर सकता है बिना किसी बहाने के
ये भीख भी मांग सकती थी परंतु ये कभी किसी से कुछ नहीं मांगती है
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