अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग हमारे जीवन मे आते हैं जो हमारे लिए हमदर्दी रखते हैं हमें तकलीफ मे सांत्वना देते हैं कुछ अच्छी सलाह भी देते हैं और कभी कभी हमारी छोटी छोटी मदद भी करते हैं जो हम लोग किसी ना किसी से भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं और एक दूसरे के साथ हमेशा मदद के लिए खड़े रहते हैं मगर किसी प्रकार का स्वार्थ रिश्ता कायम नहीं करते हैं. मित्रों किसी से प्रेम होता है तो वो सच्चा होता है जरूरी नहीं कि हमारा उससे कोई स्वार्थ हो लेकिन भावनात्मक रिश्ता जरूर जुड़ जाता है
एक वाक्या मेरे साथ भी हुआ था
मैं छोटे छोटे बच्चों को लेकर स्कूल छोड़ने जाती थी तो दीदी मुझे दूर से देखती थीं
लेकिन पहले तो मैंने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया मै सिर्फ अपने बच्चों और अपने बद्ध सास ससुर मे ही लगी रहती थी मुझे ध्यान ही कहां था जो मैं किसी की तरफ देखूँ भी
लेकिन एक बार मेरा छोटा बच्चा मेरा हाथ छुड़ा कर भाग रहा था वहाँ पर चिडियों का एक पिछड़ा था उसमे रंग बिरंगी चिड़िया थी जो बेहद सुन्दर थी वो उनको देखने के लिए भाग रहा था अब मैं एकदम पागलों की तरह उनके पीछे भाग रही थी
अब मेरा विचार ये हुआ कि एक तो बड़ा हो गया है वो तो अपने स्कूल अपने आप चला जाएगा और ये तो छोटा सा है कहीं खो गया तो अब मैंने बड़े वाले का हाथ छोड़ दिया
अब दीदी देख रही थी मुझे कहने लगी बहू वो चिड़िया देखने गया है घबरा कर मत भागों मैं देखती हू
अब मैंने देखा कि दीदी बड़े वाले का हाथ पकड़े हुए है वो कह रही थी बेटा मम्मी को परेशान मत करो
वो दीदी और कोई नहीं हमारी किराएदार थीं जो मेरे घर के सामने एक कमरे मे रहती थी और मेरे बच्चों को हमेशा देखती रहती उन्हें पकड़ती, उनको डाट देती
बच्चे उनके घर मे भी घुसने लगे थे उनकी चीजे खा जाते थे लेकिन दीदी हंस देती कहती बहू इनको कुछ मत कहो ये बाल गोपाल है
मैं दीदी को इतना प्यार करने लगी थी कि सुबह उठते ही उन्हें देखना चाहती और उनसे पूछती उनका हाल
दीदी बीमार पड़ जाती तो जो भी मुझसे बन पड़ता मैं कर देती
वो अकेली घर मे रहती थी उनके 8 बच्चे थे सारे मर गए, पति का देहांत हो गया था
मैं उन्हें इतना प्यार करती की जो कुछ बनाती दीदी को चोरी से दे आती अपने सास की आंख बचाकर
धीरे धीरे मेरा घर बदल गया मैं फ्लैट मे चली गई लेकिन वहाँ भी मुझे दीदी की याद आती रहती और हर तीज त्यौहारों मे मैं उनके पास कुछ ना कुछ लेकर पहुंच जाती
वो भी मुझे बहुत प्यार करती हम उन्हें पता चलता कि मैं पुराने घर में अपनी जेठानी के पास आई हू वो वहाँ आ जाती मुझसे मिलने
उनका नाम राजपूती था वे जाति की डोम थीं
उनके यहां हम लोग कुछ खाते नहीं थे उनको लोग छूत मानते थे लेकिन हम दोनों मे प्यार था
बच्चे बड़े हो गए थे वो सबको याद करती थी
आज वे हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी याद जब आती है तो मेरी आंखे नम हो जाती है 🌹🌹🌹
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