चैतन्य रूप

हरि का असली रूप प्रकृति मे ही समाहित है

हम लोग जब प्राकृतिक सौंदर्य को देखते है तो उसमे प्रभु का वास का अनुभव होता है

अपने घर के आसपास लगे पेंड पौधे और जीव हमें इस बात का एहसास करा देते हैं कि भगवान सचमुच हमारे आसपास ही मौजूद है हम जब पंछियों को सबसे पहले खाना देते हैं तो लगता है कि इनका ही रूप है जो भगवान के दर्शन है

सुबह की ठंडी हवा मे हमें भगवान के अस्तित्व का प्रमाण मिलता है जब हम सूर्य की पहली किरण देखते हैं तो हमे महसूस होता है कि हमारे ईश्वर पूरी प्रकृति मे वास करते हैं

जब हम किसी मंदिर जाते है तो वहाँ भी हमे भगवान के दर्शन होते हैं और हम आंख बंद करके भगवान का स्वरूप अपनी आँखों मे बसा लेते है और सोंचते है कि प्रभु आपकी बहुत दया है जो हम यहां तक आए और आपके दर्शन किए

भगवान का चैतन्य रूप हमारे अंदर ही व्याप्त है हमे कहीं बाहर खोजने की आवश्यकता ही नहीं है

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