दीपेन्द्र सबकुछ खड़ा हुआ सुन रहा था उसे बहुत ही गुस्सा आ गया था उन सभी के ऊपर लेकिन वो क्या करता उसे भी बुद्धि से कार्य करना था इसलिए वो चुप रहा
लेकिन नियति को देखो
उस लड़की की आंखों मे आंसू थे वो मौन थी आज उसके साथ पता नहीं क्या होगा वैसे भी उसकी जिन्दगी बर्बाद हो चुकी थी और अब क्या रह जाएगा जब इज़्ज़त ही चली जाएगी तो क्या रह जाएगा
उसे तो एक खिलौना बना कर यहां लाया गया है वो सोंच रही थी कि काश मेरी मौत पहले आ जाए मेरे इस शरीर को ये दरिन्दे ना नोचे
मैंने आखिर क्या गलती की थी यहां कोई उसे बचाने वाला नहीं था अब तो वो बस खुदा को पुकारने लगी अब तो वही उसे बचा सकते हैं वो आंख बंद करके खुदा से कह रही थी कि मेरी दुर्दशा होने से पहले मुझे मौत आ जाए अब तो आपका ही सहारा है और उसने आंख बंद कर ली और अपनी रूह और ये शरीर खुदा के हवाले कर दिया क्रमशः

टिप्पणी करे