यूँ ना जहर करो अपना जीवन

निष्ठुर जगत के लोगों के लिए अपना जीवन ना जहर करो ये सोंच कर की अब बर्बाद हो चुकी जिन्दगी, उजाड़ बन गया उसका चमन, वीरान हो गए बाग

लेकिन ये जान लो कि खिलेंगे फूल कभी इसमे, खुशबु से भरे फूल खिलेंगे इस चमन मे भी, बागों मे नए पत्ते भी आएंगे एक दिन

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें