देव दासी भाग 514

कामिनी अपनी माँ की बात सुनते ही रो पड़ती है और कहती है कि माँ क्या एक लड़की का हृदय खिलौना होता है

माँ कहती है बेटी हम लोगों की कोई इच्छा नहीं होती सब दूसरे की इच्छाओं पर ही अपनी खुशी होती है

जेवर भी अपने आदमी की पसंद से पहन कर जीना पड़ता है हम ठाकुरों मे तो औरते घर मे रहती है काम करती है जेवरात से लदी रहती है और पति को सारी छुट होती है हम सबको बंधन झेलना पड़ता है बेटी तुम तो मेरी हालत देख ही चुकी हो

ठाकुर लोग शराब और ऐश को बुरा नहीं मानते और ये उनका रुतबा होता है, अभी तुम कोठे वाली को भी देखना शादी मे मनोरंजन के लिए आती है क्रमशः

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