कल्लू के जाते ही शैल पकौड़े एक डिब्बे मे रख देती है और अपने घर चली जाती है
रात मे अर्जुन घर आते हैं तो देखते हैं कि घर मे खाने को कुछ भी नहीं है वे सोंचते है कि शैल आज कुछ भी बना कर नहीं गई
रोटियां भी नहीं हैं आटा भी नहीं है अब मैं क्या खाऊँ देखता हू शायद बाजार मे कुछ मिल जाए
अब अर्जुन बाहर जाते है तो देखते है कि बाहर सारी दुकाने बंद हो गई थी बहुत रात हो गई थी अर्जुन अपने साथियो के साथ ताश खेलने गए थे और आज तो उन्हें काफी पैसा मिला था वो जुए मे जीत गए थे आज बड़े खुश थे परंतु पैसा मिला भी तो क्या पेट तो नहीं भरा ना, जुए के चक्कर में वो खाने को ही भूल गए
अब वो लौट कर घर आते है तो भूख के मारे गुस्से मे डिब्बे फेंकने लगते हैं तभी एक डिब्बा कुछ भरा हुआ लगा
क्रमशः

टिप्पणी करे