कोई मन से उतर गया तो सामने रहे भी तो क्या वो कितना भी कुछ कर ले लेकिन उसके लिए मन मे जगह समाप्त हो जाती है भले ही वो कितना भी खास हो
मैंने कई बार देखा है कुछ लोगों को की एक साथ रहते हुए भी वे आपस मे बात नहीं करते एक साथ रहना उनकी मजबूरी होती है फिर भी वे लोग एक दूसरे से कोई मतलब नहीं रखते इतनी निष्ठुरता कैसे आ जाती है लोगों मे
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