दिल में छुपाकर रखता है,निगाहों से बयां
करता है,
अजीब शख्स है इश्क का अन्दाज़ निराला रखता है।
जो मेरे दिल की वीरानी ना समझा वो शख्स ही क्या जो मेरे मन की कहानी ना समझा, जीती थी उसी के लिए लेकिन वो मेरे दिल की बीमारी ना समझा लेकिन वो शख्स ही क्या जो मेरे दिल के ज़ख्म की कुर्बानी ना समझा
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