कभी कभी तो ये समझ नहीं आता कि हम क्या करें क्या ना करें
लेकिन हमे इतना तो यकीन रहता है कि जो हम करने जा रहे है वो पूरा होगा और उस यकीन के साथ आगे बढ़ते हैं
और अगर हम कशमकश मे रहते हैं कि ये हमें करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए तब हमारा समय ही निकलने लगता है हम कशमकश मे ना पड़ कर अगर एक सटीक निर्णय के अनुसार आगे बढ़े
हर इंसान के जीवन मे कशमकश होती है और कभी कभी हम ये भी जान नहीं पाते कि ये कशमकश क्यों है
जब मैं दोबारा गर्भवती हुई तो मेरे मन मे एक कशमकश थी कि कहीं मेरी दूसरी संतान भी मेरे बेटे की तरह ना हो जाए जो दो हो जाएंगे इस तरह के तो मेरा जीवन ही बर्बाद हो जाएगा मैं इसी कशमकश मे पडी रहती थी कि मैं गर्भपात करवा लू एक ही रहेगा तो मैं सम्भाल लुंगी
परंतु मेरी आत्म विश्वास ने मुझे रोका और विवेक ने कहा कि नहीं मुझे किसी की हत्या करने का कोई अधिकार नहीं है मेरे ससुर ने भी मुझे रोका की बहू ये अनर्थ मत करना बच्चे को मत हटाओ
मैंने उनकी बात मानी और मेरे दूसरा बेटा हुआ लेकिन ये पूरी तरह से सामान्य था
और जब ये दो साल का हुआ तब ये मेरे बड़े बेटे को सम्भाल लेता था
इंसान कशमकश मे ही अपना सबकुछ बिगाड़ लेता है
🌹🌹🌹
टिप्पणी करे