दुनिया अपने हिसाब से नहीं चलती हैं

हमें अनुकूलन करना होगा अपनी परिस्थितियों से, हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है हम कहीं भी जाएंगे तो हमारी परिस्थितियों से मुलाकातें होती ही रहेगी

परिस्थिति और कोई नहीं ये दुनिया ही उत्पन्न करती है और हमे कभी कभी जकड़ लेती है चारो तरफ विपरीत परिस्थितियों मे हम समझ नहीं पाते कि हम क्या करें पहले किसको खत्म करें

कभी कभी हमारी छोटी छोटी परिस्थितियों से निपटने की भी ताकत नहीं रहती

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