कामिनी कहती हैं कि माँ मुझे भी सहना होगा ये सब माँ कहती है कि हाँ बेटा
अच्छा अब तुम परेशान मत हो बेटी तो पराया धन होता है एक ना एक दिन तो बिदा करना ही होता है
अब उन लोगों के आने का समय हो चुका है तुम अपने कमरे मे जाओ
और भाभी को बुला लेना
सुमित्रा सुमित्रा कहकर माँ चली जाती है
भाभियों के साथ कामिनी भी अपने कमरे मे चली जाती है
कामिनी इंतजार कर रही है बहुत बेसब्री से सबका
तभी वो खिड़की से झाँकती है कि कुछ हलचल हो रही है शायद वे लोग आ गए है
वो तेजी के साथ कुर्सी पर बैठ जाती है भाभी लोग अंदर आती है और कहती है कि बस थोड़ी ही देर मे सब आने वाले है नाश्ता का प्रबंध करना है
कामिनी को बड़ी भाभी साड़ी देती हुई कहती है कि इनमे से लाल वाली साड़ी पहनना है तुम्हें और ये जेवर भी पहनना है मैं अभी आती हू
क्रमशः

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