शादी का असली मतलब भाग 270

तभी प्रीति भी आ जाती है और वो सुनीता से कहती है कि क्या हुआ मम्मी जी

सुनीता कहती है कि जिस बात का डर था वही हो गया

खैर अब कुछ नहीं हो सकता था मैंने ही इसे यहां रखा था अगर उसी दिन इसे निकाल देती तो आज ये पीठ पीछे छुरा ना घोंप पाती

अपने पति ही जब अपना नहीं हुआ तो दूसरी लड़की पर क्या भरोसा

प्रीति कहती हैं कि मम्मी जी सारे दिन की भूखी है आप ये तो तिरस्कृत है अब इसका काम ही यही है अखिर इसको भी तो कोई मिले इसको पापा ही मिल गए

पता नहीं इसने व्रत किसके लिए किया है आज मालुम हुआ मुझे

प्रीति अपने कमरे मे चली जाती है और रघु से कहती है कि आज सच सामने आ ही गया है

वो रूपा व्रत किसके लिए कर रही है

पापा जी उसको जल दे रहे है पी कर इसने व्रत तोड़ दिया क्रमशः

79

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें