मुझे अपने सर जी की एक बात बहुत याद आती है

मित्रों मैं 8 क्लास मे पढ़ती थी तब मेरे एक नए नए शिक्षक पढ़ाने आए वे स्वाभाव से बहुत गुस्सैल लग रहे थे उनकी आवाज बहुत तेज थी वे बहुत ही लंबे थे और उनकी गोल गोल आंखे हम लोगों को देखा करती थी हम लोग उनसे बहुत डरते थे वो हमे डराते नहीं थे कुछ भी नहीं बोलते थे

बस वे एक काम करते थे कि हम जब भी टिफिन के समय खाने जाते थे तो जो भी होम वर्क नहीं करके आता था उसका खाना छीन कर खा जाते थे

वे कहते थे कि जो नहीं पढ़ेगा वो आगे भूखा मारेगा उसको खाना खाने का कोई हक नहीं काम करके खाना खाना चाहिए

सब लोग उनसे बहुत डरते थे कि जो काम नहीं करेगा उसका खाना छीना जाएगा

एक बार मेरा भी खाना खा गए थे मैंने उनका होमवर्क नहीं किया था अब मैंने भी खूब पढ़कर जाने लगी मेरे पापा उनसे मिलने स्कूल गए थे कि जब से ये सर जी आए है तब से पढ़ने के लिए कहना ही नहीं पड़ता है

अब मेरे उन्हीं सर जी ने हमें सिखाया कि अपना काम खुद करो तब खाना खाओ आराम हराम है और वे हम लोगों को पार्क मे खूब दौड़ाते थे

जो कोई उनकी बात नहीं मानता था उसके चिकोटी काट लेते थे

हम लोगों को गाना भी सुनाते थे चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है हर बाला है सीता, बच्चा बच्चा राम है

2 बिदा कर दो मुझे माता तिरंगे का बुलावा है

3 घर जाकर साथी मत कहना संकेतों से समझा देना यदि बात मेरी माता पूछ तो आंसू एक बहा देना

मेरी बात मेरी बहने पूछते तो राखी तोड़ दिखा देना

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