कामिनी साड़ी पहनना शुरू कर देती है और कहती है कि मुझसे तो साड़ी बांधती ही नहीं है
मैं कैसे पहनूँ
वो भाभी को अवाज देती है भाभी भाभी कहा हो
भाभी कहती है कि अरे धीरे धीरे बोलो अब तुम तेज नहीं बोल सकती हो ठाकुरों की इकलौती बहू हो तुम
भाभी मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा है पता नहीं कैसा कैसा लग रहा है माँ कहा हैं पिताजी कहा है
वो सभी उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं वहाँ से बहुत लोग आने वाले है तुम्हारे भाई लोग उन्हें खाने पीने का इंतजाम कर रहे हैं और माँ पिताजी ही तो सबका स्वागत करेंगे चलो अब साड़ी पहनो और तैयार हो जाओ
अच्छा आओ मैं तैयारियां कर देती हू और वो कामिनी को साड़ी पहनाने लगती है
वो उसे जेवर पहनाती है
उसका श्रंगार करती है उसके लंबे बालों के लिए सुंदर सा फ़ूलों का गजरा भी रखा है भाभी कामिनी के गजरा लगाती है
क्रमशः

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