देव दासी भाग 516

कामिनी साड़ी पहनना शुरू कर देती है और कहती है कि मुझसे तो साड़ी बांधती ही नहीं है

मैं कैसे पहनूँ

वो भाभी को अवाज देती है भाभी भाभी कहा हो

भाभी कहती है कि अरे धीरे धीरे बोलो अब तुम तेज नहीं बोल सकती हो ठाकुरों की इकलौती बहू हो तुम

भाभी मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा है पता नहीं कैसा कैसा लग रहा है माँ कहा हैं पिताजी कहा है

वो सभी उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं वहाँ से बहुत लोग आने वाले है तुम्हारे भाई लोग उन्हें खाने पीने का इंतजाम कर रहे हैं और माँ पिताजी ही तो सबका स्वागत करेंगे चलो अब साड़ी पहनो और तैयार हो जाओ

अच्छा आओ मैं तैयारियां कर देती हू और वो कामिनी को साड़ी पहनाने लगती है

वो उसे जेवर पहनाती है

उसका श्रंगार करती है उसके लंबे बालों के लिए सुंदर सा फ़ूलों का गजरा भी रखा है भाभी कामिनी के गजरा लगाती है

क्रमशः

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