प्रीति ने कहा कि सब ढोंग पाखंड है इसका पता नहीं ये सिंदूर किसका लगाती है मुझे तो बहुत पहले शक हो रहा था इसके ऊपर
पापा जी से मुझे ये उम्मीद नहीं थी कि वे इसको पानी पिला सकते हैं खैर मैं तो अब जाती हू मुझे तो कल ऑफिस जाना है जल्दी
मेरा प्रमोशन भी होने वाला है दूसरा और वो अपने बालों को झटक कर चल देती है
उधर रूपा रो रही थी
रिकी वहां आती है और रूपा से कहती है रूपा बस करो अब तुम बहुत रो चुकी पापा जी झूठ नहीं कहेंगे
वो जल रघु ने ही दिया होगा तुम्हें
तभी पापा जी भी वहाँ जाते है और रिकी से कहते है कि मुझे रूपा का रोना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता है
अचानक वो इधर उधर घूमने लगते हैं तभी उनकी नजर बरामदे पर पड़ती है वहाँ रघु खड़ा था और पापा से इशारे से कह रहा था कि रूपा को लाओ मैं उसे यही से देखूँगा आज
क्रमशः

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