मन को उदास ना करें

माना कि मन चंचल है रोज कुछ ना कुछ चाहता है परंतु हमें उसे समझाना होगा कि हर वस्तु हमे लाभदायक और सुख देने वाली नहीं हो सकती अपने मन को समझाना होगा कि

ओ पागल मन मत उलझन कर

मत पागल कर खुद को नश्वर चीजों के लिए

एक दिन गुम हो जाएंगी नजरो से तेरे

दुख देंगी एक सुख के बदले

मत विचलित कर अपने हृदय को

ये सब खो जाएंगी एक धुन्ध के अंदर

रंग बिरंगे है सब परिन्दे है सब

सब उड़ जाएंगे एक नील गगन मे

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