प्रकाश अभी कुछ नहीं बोलते क्योंकि प्रीति और सुनीता वहाँ खड़ी थी तभी प्रकाश मुस्कुराते है
प्रीति कहती है कि यहा रोज ही कुछ ना कुछ नाटक शुरू हो जाता है मैं कहा इन लोगों के बीच मे फंस गई और सुनीता के साथ चली जाती है
रिकी और रूपा वहीँ पर रह जाती है
जब सब चले जाते है तो प्रकाश रूपा का हाथ पकड़ते है और बरामदे के ऊपर रूपा को इशारे से दिखाते हैं
रूपा देखती है कि रघु ऊपर से मुस्करा रहे हैं
और वे हाथ हिलाते है रूपा को देखकर
रूपा एक झलक रघु की देखती है रिकी भी हाथ हिला देती है दोनों को विश्वास हो जाता है कि रघु ने ही जल भेजा था क्रमशः

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