आखिरी इच्छा

चिट्ठी लिखते है कुछ ना कुछ अपने जज़्बातों को एक पन्ने मे लिखकर एक आदमी रोज रोज खिड़की से बाहर लिखकर फेंकता था

वो एकदम अकेला था

अकेलेपन ने उसे प्यार हो चुका था

उसने अपने जीवन मे मेहनत करके इस जीवन को सजाया था

परंतु उससे कुछ ऐसी गलतिया हुई जिससे उसका सबकुछ बिखर गया था

अपने अनुभवों को वो एक पन्ने मे रोज लिख लिख कर खिड़की से बाहर फेंकता था

कई सालों तक उसका ये सिलसिला चलता ही रहा परंतु उसका लिखा हुआ पन्ना ना जाने कहाँ गुम हो जाता था उसने अपने जीवन के अनुभव उसमे लिखे थे

लेकिन उसके पन्ने को कोई नहीं पढ़ने वाले थे वो सोचता था कि कोई तो उसके पन्ने को पढ़ेगा

एक बार जब उसे लगा कि वो बीमार हो गया है बहुत बीमार वो दवा भी ले आया और बहुत बीमार पड़ गया और उसने एक आखिरी खत लिखा

क्यों ताल्लुक रखते हों किसी से सब तो चले जाने है, कुछ तो प्यार करो खुद से सब तो वीरान है

तरसते रहे कुछ पाने के लिए पर पाने की चेष्टा करते ही रहे, लेकिन खोने का अंदेशा ना रहा इसीलिए तो तू हैरान है

जकड़ गया है तू एक अनोखी जंजीर से, जिसको तू ना पहचान सका तू तो खुद ब खुद एक शैतान है

खाता रहा दर्द को लेकर कई ठोकरे, प्यार की तलाश मे छटपटा कर दम तोड़ता रहा लेकिन तू समझ तू कितना बुद्धिमान है

अब जब खो दिया सबकुछ अनजानों के लिए, जो जीवन मे आकर भी चले गए तू ना समझ पाया उनको तू कितना नादान है

और उसने अपना वो पन्ना फिर बाहर फेंक दिया

और वो अपनी साँस गिन रहा था उसका अंत समय शायद आ चुका था

बस उसकी एक ही इच्छा थी कि उसका एक पन्ना तो कोई पढ़ ले

तभी एक पागल आदमी कुछ रोटी लिए हाथ मे जा रहा था उसने एक उड़ते हुए पन्ने को देखा और वो उसमे अपनी रोटी लेकर चलने लगा और सड़क मे बैठकर खाने लगा एक कुत्ते ने उसे खाते देखा और उसने उस पागल आदमी के हाथ से रोटी छीनने की कोशिश की लेकिन रोटी तो पागल के हाथ मे थी और पन्ना कुत्त लेकर भाग गया

जब कुत्ते को रोटी नहीं मिली तो उसने खाली पन्ना वहीँ छोड़ दिया और चला गया

तभी वहाँ पर एक महिला काम से निकली उसके गोद मे एक छोटा बच्चा था वो अपने बच्चे को लेकर जा रही थी

उसका बच्चा मर चुका था उसको मिट्टी के सुपुर्द करने और उसकी आंखे आंसुओ से भरी थी

लेकिन जब उसने वो लिखा हुआ पन्ना पढा तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ उसमे कुछ ऐसा लिखा था जो उसके जीवन से मिलता जुलता था

बस उस आदमी की इच्छा पूरी हुई और वो अपनी सांसे खो बैठा

जब वो अपने बच्चे को मिट्टी के सुपुर्द कर आई तो उसने पन्ने को ध्यान पूर्वक पढा

उसने पढ़ा कि उससे भी दुखी कोई दुनिया मे और भी है लेकिन उसने पता लगा ही लिया कि वो कौन है

वो उसके घर पहुंची उसने देखा कि उसका मृत शरीर पड़ा हुआ था उसने उसके मृत शरीर को भी मिट्टी के सुपुर्द करवा कर अपने घर की ओर रवाना हुई। एक नए जीवन की ओर उसने मरने का ख्याल ही छोड़ दिया

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