गालियों से आवाज

आवाज आती थी खिलखिलाहट की, लेकिन उन गालियों मे कौन था जिसके पास कोई नहीं जाता था, एक गरीब नाई और उसका परिवार, मेहनत की कमाई खाते और रोज शाम को अपने छोटे से घर मे पसंद का खाना खाते और सब एक साथ बेफिक्र होकर सोते क्योंकि उनके पास कुछ था ही नहीं चोरी होने के लिए

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