कामिनी का रूप तो आज निखर कर आ गया वो आज शीशे मे खुद को नहीं पहचान पा रही थी
अब थोड़ी ही देर मे वो लोग आने वाले है जब हम बुलवाए तभी आना
भाभी इतना कहकर चली जाती है कामिनी खिड़की से सबको देख रही है सब लोग चारो तरफ काम मे लगे हुए थे काफी हलचल थी चारो तरफ
सब जगह फ़ूलों से सजी थी बैठका को खूब सजाया गया था उसपर एक खूबसूरत सी कालीन बिछाई गई थी खाने पीने की साम्रगी एक तरफ रखी थी
और एक कमरे मे शराब के अच्छे किस्म की बोतलें रखी हुई थी
नाच गाने वाले आ चुके थे
कामिनी के बड़े से कमरे मे एक बड़ी सी खिड़की भी थी जिससे कुछ बाहर का जायजा लिया जा सकता था उसका कमरा ऊपर था
क्रमशः

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