रिकी बहुत खुश होती है वो रूपा से कहती है कि आज से तुम्हारे दुख दूर हो गए देखो रघु तुम्हें देखकर हाथ हिला रहा है वो आज खुश है
परंतु रूपा के मन मे बहुत पीड़ा थी वो पीड़ा जो घाव बनकर सीने मे बस गई थी
वो खुश नहीं थी लेकिन फिर भी उसने रघु के लंबे जीवन के लिए भगवान से कामनाएँ की थी वो रघु को कोई उत्तर नहीं देती वो अपने कमरे मे चली जाती है और रिकी से कहती है दीदी आपके आने से मुझे बहुत ही अच्छा लगा मेरा अकेलापन कम हुआ भगवान आपको खुश रखें
रिकी कहती है कि आज तुम मुझे आशीर्वाद दे रही हो तुम्हारा आशीर्वाद मुझे लगेगा जरूर
अब मेरे भी अपने घर जाने के दिन आ गए हैं मैं एक बात कहूँ तुमसे मानेगी
रूपा कहती है कि हाँ दीदी बोलकर तो देखो आपका आदेश सिर आँखों पर
अच्छा रिकी कहती है कि तुम रघु कि पिछली बातें भूल जाओ रूपा उसे नादान समझ कर माफ़ कर दो
क्रमशः

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