शादी का असली मतलब भाग 274

दीदी मैं कौन होती हू उन्हें माफ़ करने वाली मेरा उनसे रिश्ता ही क्या है दीदी वो बातें सीने के घावों की तरह लगी है ऐसे घाव जो कभी नहीं भरे जा सकते लेकिन आप कहती हो तो मैंने उन्हें माफ़ कर दिया

मैं हमेशा उनकी सलामती के लिए प्रभु से प्राथना करती रहूंगी

लेकिन दीदी अब और कुछ मुझसे आगे नहीं होगा मैं उनसे बात नहीं करुँगी ना ही उनसे मिलेंगी उनकी तबीयत खराब थी कोई काम करने वाला नहीं मिल रहा था इसीलिये मैं उनके कमरे मे चली गई थी उनकी मदद करने एक नौकरानी की हैसियत से

और मैं इस घर की क्या हू मुझे तो काम करने की तनख्वाह मिलती है मम्मी जी देती है

क्रमशः

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