मैं अपनी बीती हुई जिंदगी के बारे मे याद करती हू बैचैनी सी हो जाती है मुझे
क्यों याद आती है मुझे वो सब बाते जिनका कोई आस्तित्व नहीं कोई अर्थ नहीं
मैं पछताती हू की जिन लोगों ने मुझे सताया मैं उनसे लड़ नहीं पाई उन लोगों का मुकाबला नहीं कर पाई
मैं अपनी बीती हुई जिंदगी के बारे मे याद करती हू बैचैनी सी हो जाती है मुझे
क्यों याद आती है मुझे वो सब बाते जिनका कोई आस्तित्व नहीं कोई अर्थ नहीं
मैं पछताती हू की जिन लोगों ने मुझे सताया मैं उनसे लड़ नहीं पाई उन लोगों का मुकाबला नहीं कर पाई
टिप्पणी करे