मेरे सारे सपने अधूरे ही रह गए

20 वर्ष की उम्र में विवाह हुआ उसी साल बेटा भी हो गया वो भी मानसिक रोगी

मैं कुछ कर ही ना सकीं

मैंने उसी साल स्नातक किया था और उसी साल मेरी शादी हो गयी

जब मेरा बेटा मानसिक रूप से ठीक नहीं था तब लोग फायदा उठाते थे मेरी मजबूरी का अब मैं अपने बेटे को संभालने का काम करूं या सबसे मुकाबला क्योंकि गलतिया मेरा बेटा ही करता था कुछ बच्चे उसके ऊपर झूठा आरोप भी लगा देते थे

एक दिन मैंने देखा कि एक लोग उससे नाली साफ करवा रहे थे मैंने देखा कि किस तरह वो गंदगी मे घुसा था

मैं जब उन लोगों के ऊपर गुस्सा होने लगी तो वो लोग मेरा अपमान करने लगे मैं चाह कर भी उन लोगों से मुकाबला नहीं कर पाई

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