जो हमारे सारे कार्य को देख रही है हम अगर कोई काम छिप कर करते हैं और ये समझते हैं कि कोई व्यक्ति नहीं देख रहा है लेकिन कुछ काम छिप कर ही करने पड़ते हैं हमें अपनी छिपी हुई शक्ति का आह्वान करना चाहिए फिर किसी कार्य को करना चाहिए
अब एक किस्सा है कि एक बहू को ससुराल वाले खाना नहीं देते थे सब लोग जब खाना खाने बैठते तो सारा खाना खा डालते और जब खाना बचता जला हुआ तब वो बहू किसी तरह खाती उसको रोटी नहीं मिलती थी जो रोटी बच जाती तो सास उसे पिटारे मे रख देती और ताला लगा देती
अब बहू घर का सारा काम कर लेती तब वो खाना खाती
तभी उसे ख्याल आता कि काश उसे दो रोटियां मिल जाती तो वो खा लेती उसे रोटियां खाने की इच्छा हुई
उसने अब एक उपाय निकाल लिया वो अब सबसे पहले रोटी निकाल लेती और उसे अपने वक्षस्थल मे कपड़े से छिपा लेती
और बर्तन मांजने का पानी भरने के बहाने वो कुएं के पास रोटी निकाल कर खाती और घर वापस आ कर बचा हुआ काम करती
अब वो मिठाइयाँ, पूरी भी इसी प्रकार खाने लगी वो क्या करती कोई उसे खाने को ही नहीं देता था वो सुख कर काँटा हो गई थी
इसी तरह वो खाना चुरा कर खाती और खुश रहती
सास ने सोंचा की ये तो खुश रहती है जरूर कुछ गड़बड़ है
अब उसने देखा कि बहू रोटी अपने कपड़े मे छिपा रही थी
सास ने कुछ नहीं कहा अब वो रोटी के पास ही बैठने लगी और खाना खुद परोसने लगी वो पहले ही सारी रोटियां पिटारे मे रख देती
अब बहू को रोटियां मिलनी बंद हो गई बहू फिर भूखी रहने लगी और उदास भी रहने लगी
एक दिन कुलदेवी की पूजा थी सास पुड़िया और मिठाइयाँ बना कर एक जगह रख दी और फूल लेने चली गई तभी बहू ने मौका देखा और कुछ पुड़िया निकाल कर छिपा ली उसको नहीं पता था कि सास पुड़िया गिन कर गई है
उसकी सास बहू को किसी से ना बोली देती ना किसी के घर ले जाती कोई आता तो बहू को आने ही न देती
अब सास मंदिर पूजा करने के लिए गई तो उसने जब प्रसाद अर्पण किया तब उसमे से कुछ पुड़िया और मिठाई कम निकली
उधर बहू ने फिर कुए के पास जाकर मिठाइयाँ और पुड़िया खाने के लिए जहाँ हाथ बढ़ाया वहाँ पर एक भूखा बंदर बैठा था बहू ने उस बंदर को भी एक पुड़ि और एक मिठाई का टुकड़ा दे दिया और बहू ने भी खा ली
अब सास जब घर आई तब उसने बहू को खूब मारा और कहा कि चुड़ैल मुझसे चालाकी करती है, अपने घर से तो कुछ लाई नहीं और हमारे घर मे कुलदेवी के प्रसाद को जूठा करती है
अपने घर मे तो तेरे रोटी के लाले पड़े है और हमारे घर मे चोरी करती है अगर मैं अपने बेटे को बता दूंगी तो वो तुझे घर से निकाल देगा और मैं अपने बेटे का दूसरा ब्याह कर दूंगी
अब तेरे लिए यहां कोई जगह नहीं और उसे मायके भिजवा दिया
4 साल से एक भी बच्चा नहीं जना तूने सभी के बच्चे हुए है
बहू को बेटे से कह कर मायके भिजवा दिया कि कुछ दिन इसको छोड़ आओ दो चार महीने रहेगी तब इसका मन ठीक होगा
और बहू को मायके भिजवा दिया
अब बहू चली गई उसने सास से बहुत माफ़ी मांगी पर सास कहा सुनने वाली थी
अब उसके जाते ही गाँव मे आजीब अजीब होने लगा
सांप आने लगे और सबको डसने लगे, बाढ़ आने लगी आँधी आने लगी
चोरियां होने लगी
आसार ठीक नहीं लग रहे थे
तभी दूसरी बार पुरोहित ने कुलदेवी का मन्दिर खोला
उसने देखा कि कुलदेवी ने अपने दांतों तले उंगली दबा ली है और उनकी आंख से आंसू गिर रहे है पुरोहित समझ गया कि कुलदेवी नाराज है
अब उसने पंचायत बुलवा दी और सबसे कहा कि आगे स्थिति खराब ना होने पाएं किसी से कोई गलती हुई है सबसे मैं कह रहा हू की अगर कुलदेवी ने अपने दांतों तले से अपनी उंगली तीन दिन मे ना हटाई तो पूरा गाँव बर्बाद हो जाएगा और देवी पाताल लोक मे समा आएँगी
सब लोग अब जल्दी से एक फूल लाओ और माँ के चरणों मे अर्पित करो और माँ से माफ़ी मांगों
सब लोग आए और माफी भी मांगी लेकिन कुलदेवी का क्रोध खत्म नहीं हुआ
पुरोहित जी ने कहा कि सब अपनी बहुओं को मायके से लाओ और उनके द्वारा फूल अर्पित करो सारी बहुएं भी आ गई तब भी कुलदेवी का गुस्सा ना खत्म हुआ तभी एक ने कहा कि इनकी बहु मायके मे है उसे नहीं बुलाया गया
पंडित जी ने अपनी पालकी बहू को लाने के लिए भेजी
बहू आई और उसने फूल अर्पित किए और कुलदेवी से क्षमा मांगी और कुलदेवी के चरणों मे गिर गई
कुलदेवी का गुस्सा खत्म हुआ और वो सामान्य हो गई
पुरोहित जी ने बहू से पूछा कि ऐसा तुमने क्यों किया डरों मत पूरा गांव तुम्हारे साथ है दोषी को सजा दी जाएगा यहां झूठ मत बोलना
तब बहू ने सभी के सामने अपनी कहानी सुनाई सबने कहा कि तुम्हारे घर मे तो धन धान्य कि कमी नहीं है फिर भी तुमने बहू के साथ ऐसा बर्ताव किया सास क्या कहती झूठ वो बोल नहीं सकती थी कुलदेवी का खौफ था
सास ने बहू से माफी मांगी और कहा कि आज से ये मेरी बेटी से बढ़कर है अब मैं ऐसा कभी नहीं करूंगी आप सब मुझे माफ़ करो
मंदिर मे जय माता दी के जय कारें होने लगे ढोल बजने लगे
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