मुर्दा घर के मुर्दों की बातें

एक मुर्दा घर मे कुछ लाशें पोस्टमार्टम के लिए आई उसमे सारे मुर्दे अपनी अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे थे और उनको अपने परिजनों के पास भी जाना था उनका भी इंतजार कर रहे थे

उन्हें भी बहुत तकलीफ हो रही थी उनका शरीर सड़ गया था और वे सब अब इस शरीर से मुक्त होना चाहते थे उनका सूक्ष्म शरीर उन सभी के शरीर के पास घूम रहा था

उनमे से कुछ मुर्दे जमीन मे पड़े थे

कुछ एक लोहे के बेड पर पड़े थे खून से लथपथ

एक ने आत्महत्या की थी

जिसने आत्म हत्या की थी वो सबसे ज्यादा परेशान था उसका शरीर धरती पर पड़ा था पैर मे एक रस्सी बंधी थी लेकिन जो पोस्ट मार्टम करता था वो छुट्टी पर था इसलिए देर लगी थी

सब मुर्दे एक दूसरे से बातें करने लगे एक कहता है अरे बे मेरे ऊपर से पैर हटा

कैसे हटाएं मैं तो मरा हुआ हू मेरे हाथ पैर हिल तक नहीं रहें

दूसरा कहता है साले मेरे ऊपर इतनी देर से लदा हुआ है साले नीचे उतर

एक मुर्दा ड्रायर मे पड़ा हुआ है वो कहता है कि अरे भैया मेरा ड्रायर खोल दो मैं सड़ रहा हू

तभी एक महिला की लाश भी पडी थी एक बेड पर जो लोहे का बना था वो अचानक रोने लगी कहने लगी चुप रहो बेशर्मी की भी हद्द है तुम लोगों की कितना लड़ रहे हो मेरी तो हत्या की गई थी मुझे किसी ने जहर दिया था मेरी आत्मा भटक रही है उसका पता लगाने के लिए

एक मुर्दा बोलता है कि अच्छा, चिंता मत करो जिसने तुम्हें जहर दिया है वो भी यही ही आएगा मर कर

तभी एक मुर्दा अचानक हिलने लगता है और कहता है अरे मैं तो हिल रहा हू क्या मैं जिंदा हू

तभी एक कहता है कि अरे लगता है भूकम्प आ गया है अरे भाई सब कुछ हिलने लगा शायद हम चीर फाड़ से बच जाएं अगर भूकम्प आ गया है तो

एक कहती है चुप रहो शायद कोई आ रहा है मुझे लेने मेरा पोस्ट मार्टम हो चुका है मेरे कितनी सिलाई लगी है जगह जगह सिला हुआ है मैंने फांसी लगाई थी

मैं कितनी मुर्ख थी अपनी जिंदगी से खुद हाथ धो बैठी अब यहां सडन मे रहना पड़ रहा है दो दिन से मेरा शरीर यहां पड़ा हुआ है

तभी एक मुर्दा खड़ा हो जाता है कहता है कि अरे मुझे अभी अभी आभास हुआ कि मैं कूछ देर और जिंदा रह सकता हूं मैं एक बहुत खराब इंसान था मैं ट्रक के नीचे आ गया था मैंने कभी किसी की भलाई नहीं की शायद आज मुझे इस सडन मे रहने की सजा मिली है

मुझे किसी ने जानबूझकर कुचला था मैं शराब पीकर रास्ते से आ रहा था

मैं वेश्याओं के पास जाता था अपना सारा पैसा लुटा देता था मेरी पत्नी बच्चे तकलीफ उठाते थे

मैं उन लोगों को एक बार देखना चाहता हू उनसे माफी मांगना चाहता हूं परंतु मुझे अभी कुछ कुछ होश आया है

तभी एक कहता है कि तुम तो भलाई नहीं किए किसी की हम लोगों की भलाई कर दो वो दरवाजे को खोल दो सबको ड्रायर से बाहर निकाल दो

थोड़ी देर मे तो तुम मर जाओगे फिर से

हमारा भला करो शायद तुम्हारी मनो कामनाएँ पूरी हो

अब उस मुर्दे ने धीरे धीरे सबको ड्रायर के बाहर निकाला

अब वो दरबाजा खोलने जा रहा था

लेकिन दरबाजा बाहर से बंद था उसने एक खिड़की से अपना मुह निकाला तभी एक लड़के ने देख लिया मुर्दा घर से एक मुह निकला हुआ था वो लड़का गर्मी मे बाहर सो रहा था वो चिल्लाया और बहुत डर गया था

मुर्दा चिल्लाया अरे बाहर का दरबाजा खोल दे लड़के

नहीं तो आज रात ही तू मर जाएगा और यही आ जाएगा

लड़का भाग कर सबको बुला लाया और सबने उस मुर्दा घर का दरवाजा खोल दिया और देखा कि सब कुछ अस्त व्यस्त है और जो खिड़की से झांक रहा था वो भी गिरा पड़ा है

तभी उसके बच्चे भी आते हैं और वो बापू बापू कहकर रोने लगते हैं और उस मुर्दे की आंखे अपने आप बंद जो जाती है मानो वो सबकी राह देख रहा हो उसकी मनोकामनाएं पूरी होती है और सभी के पोस्ट मार्टम का काम शुरू हो जाता है कहानी समाप्त

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें