एक लड़का गाँव से शहर नौकरी करने आता है जवां सुंदर,
एक किराए के मकान मे रहता है काम भी करता है
अचानक उसे अपनी मकान मालकिन से प्यार हो जाता है वो उम्र मे उससे बड़ी होती है
उसके तीन बच्चे होते है मकान मालकिन भी बहुत सुन्दर और जवां
वो अनछुआ, नादान भोला लड़का उस महिला के चक्कर मे पड़ जाता है और उसे पता ही नहीं लगता कि कब उसे उस महिला से संपर्क हो गया
उस महिला का पति कमजोर था वो उसे संतुष्ट नहीं कर पाता था इसलिए वो अक्सर रात मे कहीं भाग जाता था उसके तीनों बच्चे कहीं सो जाते थे और वो महिला उस लड़के के कमरे मे चली जाती उस लड़के के साथ उसे बहुत मज़ा आता
दिन बीतते गए, गुज़रते गए अब उस महिला का जी उससे भर चुका था उसके बच्चे भी अब बड़े हो चुके थे
तभी एक दिन उस महिला ने उससे कहा कि अब मेरे घर से सास ससुर आने वाले है और कुछ रिश्तेदार भी आएंगे तुमको ये कमरा खाली करना पड़ेगा बाद मे मैं तुम्हें बुलवा लुंगी
उस लड़के ने कहा सास ससुर और रिश्तेदार तो कई बार आए तुमने तो मुझसे कभी ऐसा नहीं कहा ब्लकि मैं ही अपनी माँ को तीन साल से ना देख सका
तुम्हारे लिए मैंने सबको छोड़ दिया क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करती
अब वो महिला कुछ ना बोली
अगले दिन उसके आदमी ने कहा कि तुम अब यहा से निकलो दूसरा घर ले लो अब
उस लड़के को अचंभा हुआ कि ये कैसे बदल गई पहले तो मुझे लुभाने के लिए क्या क्या नौटंकी करती थी आज देखो इसे क्या हो गया
उसने अपने सामान बाँधना शुरू कर दिया
थोड़ा सा उसका सामान था और वही पास मे उसे एक घर भी मिल गया था
उसका तो सबकुछ चला गया था उसने अपना कितना नुकसान उस महिला के लिए लिया, गलती भी उसी की थी वो उस महिला पर विश्वास कर बैठा
उसे अपने साथ अपनी माँ को रखना चाहिए था वो कितना कष्ट उठाती रही उसके कारण
लेकिन कोई बात नहीं अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है
और उसने अच्छी नौकरी की चेष्ठा शुरू की और अब उसकी नौकरी एक अच्छी कंपनी मे लग चुकी थी वो अपनी माँ को भी ले आया था
तभी एक दिन उसकी माँ ने कहा बेटा बहुत अच्छा रिश्ता आया है शादी का और लड़की भी अच्छी है
शादी भी हो गई अब पहले दिन से वो लड़का भाग रहा था क्योंकि वो तो कमजोर हो गया था
जब रात्री हुई पहले मिलन की तो वो एक चिट्ठी लिख कर अपनी पत्नी के पास रख गया कि मैं तुम्हारे लायक नहीं हू मैं तुम्हें प्यार भी नहीं कर सकता मुझे तुम्हें देखकर ही पसीना आता है
लेकिन पत्नी मायके भी गई वो वहीँ रहीं उसे डर था कि उसकी हंसी उड़ेगी बिरादरी मे
लेकिन वो भी कितना सहती उसने अपने माँ बाप को सारी बात बताई और वो चिट्ठी दिखाई और वो ससुराल छोड़ कर चली गई
उधर वो लड़का अपना इलाज एक डॉक्टर से करवा रहा था उसके गुप्त रोग हो गया था
डॉक्टर ने कहा कि अभी समय लगेगा ठीक होने मे, तुम लड़के कुछ सोंचते समझते नहीं हो और किसी से संबंध रख लेते हो जीवन मे सावधानी रखनी चाहिए
6 महीने बाद वो लड़का ठीक होता है उसके अंदर फिर से वही उत्साह आ जाता है वो अपनी पत्नी को पत्र लिखता है कि मुझे माफ़ कर दो मैंने तुम्हें बहुत दुख दिए
और मैं तुम्हारे घर तुम्हें लेने आ रहा हू अब कोई गलती नहीं करूंगा तुमने मेरा इंतजार किया इसके लिए धन्यवाद
और वो अपनी पत्नी को लेने चला गया उसके घर मे खुशिया लौट आईं। कुछ दिनों बाद उसकी बगिया मे एक नन्ही सी बेटी ने जन्म लिया। कहानी खत्म
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