लड़की भी अपने पैर खोल लेती है और छिप जाती है एक गड्ढा मे
दीपेन्द्र उसको खूब मारता है बॉस अपनी जान बचाकर बाहर की ओर भागता है और कहता है अपने दोस्त से कि तुमने मुझे धोखा दिया वहां पर तुम गए थे और तुमने उस लड़की को खोल दिया था अब वो वहाँ से भाग गई है वहाँ पर किसी ने मुझे जोर से पकड़ लिया था
दूसरा कहता है कि अरे भाई वहाँ पर भूत प्रेत तो नहीं है कोई भटकती आत्मा तो नहीं है किसी की रूह तो नहीं है
लेकिन वो लड़की खुली कैसे
बॉस मैंने कुछ नहीं किया वो तो पहले से ही खुली थी उसका मुह खुला था पहले से वो बोल रही थी
बॉस कुछ समझ नहीं पाता है वो कहता है कि उस लड़की को ठिकाने तो लगाना ही पड़ेगा खैर कुछ ना हो सका सारे मंसूबों पर पानी फिर गया है
चलो उसको खोजते है चलो कट्टा उठाओ अपने हाथ मे हथियार रखो देखते ही गोली मारकर उसे पास वाली कब्र मे गाड देंगे
क्रमशः

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