नर कंकालों की दुनिया है ये

हाड़ मांस के सजे हुए ये कंकाल अपने आपको क्या समझते है ये सब अपने मुह से तरह तरह की आवाजें निकालते है, साँस लेते हैं, खाना खाते हैं

इनके अंदर कितनी हड्डियां, मांस पेशिय ,ऊतक, कितने अम्ल होते है, इनके अंदर वसा ही वसा होता है

झूमते है इतराते है हंसते है, रोते है आंख से पानी निकालने लगते हैं

ये सब अपने ही जैसे कितने कंकाल उत्पन्न कर चुके हैं

भगवान ने इन्हें बुद्धि दे दी ये अपनी बुद्धि चलाते है लेकिन कर्म के बंधनों मे बंध कर रह जाते हैं

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