
किसी के प्रति आकर्षित होना स्वाभाविक है हम हम युवा होते है किसी का प्यार पाने और किसी को प्यार करने की चाहत होती है और हम एक मजबूत सहारे की तलाश करते हैं
ये तलाश पूरी होती है जब हम किसी को पा लेते हैं
हमे ऐसा कोई साथी चाहिए जो हमे समझ सके और हम उसे समझ सके
एक ऐसा सहारा जो हमारा हो जिसके ऊपर हम अपनी जान लुटा सके उसमे कोई भी संशय नहीं है जब हम किसी की कल्पना करते है, कल्पना मे अपने साथी को पाते है, कल्पना मे अपने साथी के साथ वो कर गुज़रते है जो हम उसके साथ यथार्थ
मे नहीं कर पाते,सपने को साकार करने के लिए किस प्रकार की उम्मीदों को अपने दिल मे रखते हैं
ये उम्र एक नाजुक दौर से भी गुज़रती है कभी कभी कोई अपने प्यार का इजहार भी करता है तो हम उसका इजहार स्वीकार नहीं करते हम उससे डरते हैं कि अगर ये हमे छोड़ कर चला गया तो इसका वियोग कौन सहेगा और हम उसकी किसी भी बातों का ध्यान नहीं देते हैं और एक दिन वो हमारे जीवन से चला जाता है
अगर हम किसी पर बिना किसी परिचय के विश्वास करते हैं तो वो बहुत ही घातक सिद्ध हो सकता है
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