आहत भाग 186

सब कहते हैं लेकिन वो गई तो कहा गई यहां भी नहीं है कहा भाग गई उस्ताद खोजो उसे सारा मजा किरकिरा हो गया मैंने कहा था कि सामान लेने मत जाओ परंतु मेरी सुनता ही कौन है मैं पागल हू ना सब मुझे पागल समझते है

अब भोगों सब बेवकूफ़ लोग

उधर दीपेन्द्र उस लड़की को एक गड्ढा मे लेकर छिपा था वो लड़की कुछ बोलना चाहती थी परंतु दीपेन्द्र उसे मुझे पर उंगली रखकर चुप रहने को कहता था तभी दीपेन्द्र एक बड़ा सा ईंट उठा लेता है चांदनी रात होती है

पूरे कब्रिस्तान मे सुनसान सा अंधेरा, चंद्रमा की रोशनी कब्रों पर पड़ रही थी वहाँ पर कुछ पुराने पेंड थे जो कब्रों को चीर कर निकले थे

क्रमशः

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