कभी कभी मैं दूसरी दुनिया के बारे मे सोचती हू

ना जाने इस दुनिया मे कितने रहस्य छिपे हुए है एक दुनिया मे कितनी दुनिया छिपी हुई है ,लेकिन क्या हमे पता है कि एक दुनिया ऐसी भी होती है जो सारी दुनिया से परे होती गई वो कौन सी दुनिया है जिसमें कुछ लोग अपने आपको खो देते हैं

वो है भौतिकता की दुनिया, वो दुनिया उसमे साधारण से साधारण लोग लीन हो चुके है वो दुनिया जिसमें सिर्फ ऐसी सुख सुविधाओं के पीछे इंसान भागता है जिसमें उसको लगता है कि वो बिल्कुल सुरक्षित और खुश है

यकीन नहीं होता कि एक इंसान उसमे बिल्कुल खो सा गया कि उसे अपने बारे मे भी याद नहीं रहता

महंगे महंगे घर, पत्थरों से बने हुए घर मे इंसान रहता है अपने को पूरी तरह से संपन्न मान लेता है उसे लगता है कि अब उसे किसी भी रिश्ते की जरूरत नहीं है इस दुनिया मे वो साबित कर देता है कि उससे बड़ा मूर्खतापूर्ण कार्य कोई नहीं कर सकता

कितना अलग हो गया है इंसान जो वो खुद को भी पहचान नहीं पाता और वो अपनों की परिभाषा ही भूल चुका

थोड़े से रंग बिरंगे संसार को देखकर वो उसकी रंगीनियों मे इतना खो सा गया है कि उसे अब सुध ही कहां है ये कितना खतरनाक है कि उसने खुद ही अपने को अकेला और असुरक्षित कर लिया

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