मेघना अतुल को देखती है और कहती है मैं भी कितनी बदनसीब हू आज मेरा खेत बिकने की कगार पर है तुम मुझे मर जाने दो मैं बच भी गई तो क्या मिलेगा सबको और क्या मैं खुश रह पाऊँगी कभी
मेरा ऑपरेशन मत कराओ तुम मैं जितने दिन भी जिदंगी की जंग है लड़ेंगी
उत्तम कहते हैं कि पैसे का जुगाड़ हो गया है अब चिंता की कोई बात नहीं है कुछ मैं बैंक से निकालता हू कुछ ऑफिस से लोन ले लूँगा कुछ अतुल से उधार ले लूँगा खेत नहीं बिकेगा अब तो तुम खुश तुम मेरे लिए क्या हो तुम्हें नहीं पता, तुम्हीं तो मेरा सबकुछ हो मेघना
तुम्हारे बिना तो मैं शायद जी ही नहीं सकता क्रमशः

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