देव दासी भाग 520

कितनी सुंदर लग रही थी कामिनी आज लाल रंग के कपड़े उसके ऊपर खिल थे

भाभी लोग कामिनी को लेकर सभी के पास जाती है वहा फ़ूलों से पूरा कमरा सजा हुआ था चारो तरफ बत्तियां लगी थी

वीर सिंह वहाँ बैठे हुए थे

कामिनी को देखते ही सब उठ कर खड़े हो जाते है कामिनी की सास कामिनी का हाथ पकड़ कर अपने पास बैठा लेती है कामिनी के ससुर भी वहाँ बैठे रहते हैं

उसकी जगह सौम्य भी बैठे हुए हैं छोटे से प्यारा सा

सब लोग कामिनी को बहुत ही गौर से देखते हैं और सास कहती हैं कि ठाकुरों की बहू ऐसी ही होनी चाहिए

और अपने सूटकेस से कुछ साड़ियां निकाल कर बाहर रखती है अनूठी निकालती है out चढ़ावे का सामान और सबको देने के लिये नेग भी। क्रमशः

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