श्मशान की दुनिया

इन्हें देखो तो ऐसा लगता है कि ये कितना सबकुछ छोडकर इस दुनिया मे आए हैं इनकी भी अजीब दुनिया होती है कितने शरीर बंधे हुए हैं और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं इन्हें भी अपनी चिता का इंतजार है इन्होने भी अपनों को बहुत देख लिया है लेकिन ये अपनों का मोह छोड नहीं पाते

चारों तरफ शरीर के उतारे हुए कपड़े किसी एक कोने मे फेंक दिए गए हैं अब वो कपड़े इनके परिजन छूने मे भी कतरा रहे हैं ये सब महसूस कर चुके है कि अब हमारी किसी को जरूरत नहीं है

इनकी अर्थी के बांस और फूल भी उधर फेंके गए है

चारो तरफ आग ही आग जल रही थी

जलने की बदबू भी आ रही थी इनकी आग कितनी ऊंची ऊंची उठ रही थी कि मानो ये आकाश को भी छुना चाहती है

इनके जलने के अवाज आ रही है जैसे कि किसी लकड़ी को चीरा जा रहा है इनके परिजन इनकी खोपड़ी मे डंडा मार रहे है वही बेटा जिसको इस शरीर ने उत्पन्न किया था और बड़ा किया था आज वही बेटा उसको डंडा मार रहा हैं

एक चिता से अचानक धड़ाम की अवाज आती है सब कह रहे थे कि इसकी खोपड़ी मे विस्फोट हुआ है

एक तरफ बिजली के चूल्हे बने हुए है उनमे लाश को डाल रहे हैं और थोड़ी देर मे सब राख के ढेर

इनके परिजन अब क्रिया कर्म करके गंगा नहा रहे हैं और एक दुकान मे जाकर मिठाई और चाय पीते है

🙏🙏🙏🙏🙏

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें