बिदाई एक शहीद की

एक फौजी की अंतिम बिदाई हो रही थी वो शहीद हो चुका था युद्ध मे उसके तीन बेटे और भी थे जो अभी छोटे छोटे थे

वो अपने बेटों से कहता था कि मैं जब शहीद हो जाऊँ तो तुम लोग रोना मत और ना मम्मी, दादी को रोने देना

अब जब वो शहीद हो गया तब जब उसकी बॉडी घर आई तब उसकी पत्नी बेहोश हो गई क्योंकि उसने पहले ही सबको रोने के लिए मना किया था

अब माँ बची माँ भी नहीं रोई उसने अपने शहीद बेटे के मुह मे गंगा जल डाल दिया

अब सब असमंजस मे पड़ गए कि ये लोग क्यों नहीं रोये इसके शहीद होने मे

और ना ही होश आने के बाद उसकी पत्नी ही रोई

अब लोग तरह तरह की बातेँ करने लगे कहने लगे कि ये लोग क्यों दुखी होंगे

पत्नी को 1 करोड़ रुपये मिलेंगे, माँ को पेंशन मिल ही रही है इसका पति भी तो शहीद हुआ था, बेटों को नौकरी मिल जाएगी सारा काम तो बन गया है

छोटा बेटा सब सुन रहा था वो कुछ भी ना बोला बस वो अपनी माँ के पास जाकर बैठ गया और बोला माँ और अपनी माँ की गोद मे सिर रखकर लेट गया

माँ ने कहा बेटा पापा ने तुझे भी रोने के लिए मना किया था ना

जा अब तू दादी के पास जा वो अकेली है

बेचारी माँ अपने बेटे की अर्थी के पास बैठी थी उन सुखद पलों को याद कर रही थी जो उसने उसके साथ बिताए थे

उसकी शैतानियों के दिन याद कर रही थी परंतु वो रो नहीं रही थी

चारो तरफ सब रो रहे थे भीड़ लगी हुई थी रिश्तेदार, पड़ोसी और भी लोग वहां पर आए हुए थे

अब अंतिम बिदाई का समय आ चुका था शहीद की अर्थी उठने लगी सब फूल अर्पण कर रहे थे

जब सब चले गए और तब भी फौजी के बच्चे, माँ और पत्नी नहीं रोई तो एक रिपोर्टिंग करने वाले ने पूंछ ही लिया कि आपके एक ही बेटा था फिर भी आप ना रोई और आपकी बहू और बच्चे भी ना रोये

तब फौजी की माँ ने कहा कि मेरे बेटे ने सबको रोने के लिए मना किया था और कहा था कि एक शहीद के लिए घर वाले नहीं रोते गर्वीले होते हैं उसने कहा था कि मैं फिर आऊंगा, तुम लोग रोना मत मैं तुम लोगों के ही पास हू

बेटों से कहा कि तुम लोग भी सेना मे भर्ती होना और देश की रक्षा करना

हम फौजी कभी मरते नहीं युगों युगों तक जिंदा रहते हैं सभी के दिलों मे, रो कर मुझे अपने दिलों से अलग मत करना इस दिन को हमेशा याद रखना जय हिंद

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