हम सोंचते है कि हम किसी से नजदीकियां बढा ले ताकि वो हमारे दुख तकलीफ में साथ दे लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि ज्यादा नजदीकियां अक्सर नुकसानदायक साबित होती है
ठीक है थोड़ा सा मेल मिलाप अच्छा है थोड़ी देर के लिए किसी से मिल लेना, बात कर लेना, अगर किसी को कोई जरूरत है तो अपने सामर्थ्य के अनुसार मदद करना बेहतर है, लेकिन हम किसी से कोई उम्मीद लगाते है, या अपना अकेलापन दूर करने के लिए किसी को अपने घर बुला लेते हैं और या उसके घर मे समय बिता लेते हैं तो ये उचित नहीं
कभी कभी अक्सर देखा गया है कि हम किसी पर जरूरत से ज्यादा विश्वास कर लेते हैं जो कभी हमारे लिए हानिकारक साबित हो सकता है
कभी कभी हम अपनी कमजोरी किसी को बता देते हैं तो वो बाद मे हमे तंग कर सकता है और वो हमसे फायदा उठा सकता है
प्रेम से सारी दुनिया चलती है लेकिन वो भी सोंच समझ कर
करना उचित होगा ,जितना हो सके सम्भल कर रहा जाए कभी कभी अपनी सुई भी खुद को चुभ जाती है जिसे हम संभाल कर जतन से रखते हैं
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