बस वे जिंदा रहते हैं इश्क वाले

प्यार के परवाने, हुस्न के दीवाने, बस जिंदा रहते हैं

ना कुछ पाते है बस खो जाने का गम सहते ही रहते है

किस्मत की लकीरें भी उनका साथ कभी कभी नहीं देती बस वे हवा के रुख को महसूस करते ही रहते हैं

जीवन क्या है उन्हें मालूम नहीं बस वो उसकी ही याद मे तड़पता रहता है बस वे अपने प्यार को पाने का प्रयत्न करते ही रहते हैं

जब उतरता है भूत इश्क का तब उन्होंने अपनी जिंदगी मे क्या खो दिया इस पर पछताते रहते हैं

किस्मत ने कभी उनको कुछ करने का मौका दिया था पर किस तरह गवाया उसने अपनी उन्नती का पल ये सोंच कर इश्क वाले अपने हाथों को मलते रहते हैं

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