सावन के महीने मे जब ब्याहता अपने मायके मे होती है तब

अभी सावन का महीना चल रहा है ,बरसात की फुहारें पड़ती है, नई नई शादी और नई नई उमंग झूले के साथ साथ हिलोरें लेती है सावन मे कितना अच्छा लगता है जब ठंडी ठंडी बरसात की बूंदे शरीर पर पड़ती है बार बार अपने पिया की याद मे वो ब्याहता मुस्करा उठती है

कहती है ओ मेरे सलोने पिया तुम कहां हो दहाड़े मार रहा है मेरा जिया

ओ मेरे प्यार और मेरे चित चोर तुम भी आओ और लगा दो मेरे झूले मे जोर

मैं गाऊँ गीत प्यार के तुम गाओ गीत मिलन के, बिजली सी दहक रही है मेरी देह नाच रहे है जंगल मे मोर

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