जब मैंने एक कुत्ते का नाम पिल्लू रखा

मुझे एक कुत्ते का बच्चा इधर उधर घुमते हुए मिला वो भूखा प्यासा घूम रहा था कीचड़ मे सना हुआ

मेरे छोटे भाई ने उसे पकड़ लिया और एक कपड़े मे लपेट कर घर ले आया सब लोग उसे डांटने लगे क्योंकि वो बदबू मार रहा था और खूब चिल्ला रहा था

लेकिन मुझे उसपर दया आ गई मैंने और मेरे भाई ने उस पिल्ले को साबुन लगा लगा कर खूब नहलाया

वो चुप हो गया क्योंकि उसे भी अच्छा नहीं लग रहा था जब वो गन्दा था

अब हम दोनों ने एक कटोरी मे उसे दुध पीने को दिया वो बहुत ही सुंदर पिल्ला था भूरे रंग का उसपर कुछ सफेद रोएँ भी थे इसलिए वो कुछ कुछ पीला पीला सा लगता था उसकी कंचे की तरह आंखे थी और वो हम ही लोगों को बार बार मूड मूड कर देखता था वो इतना सुंदर और प्यारा लग रहा था कि मेरे घर वालों ने उसे घर से भगाने का प्लान ही रद्द कर दिया था अब वो हम लोगों के साथ रहने लगा वो सबकुछ खा लेता था रोटी, दुध सब्जियां दाल चावल जो हम लोग खाते थे वो भी खाता था

अब मैंने उसका नाम पिल्लू रख दिया वो बाहर भी घुमते रहता था उसको हम लोग पिल्लू कहकर बुलाते तो पिल्लू भागते-भागते आ ही जाता था

हम लोग जब स्कूल से आते तब पिल्लू हम लोगों के पैरों मे लिपट जाता था और हम लोगों के साथ खेलने लगा था

अब वो घर से बाहर भी निकल जाता था एक दिन हम लोगों ने पिल्लू को बाहर भी नहीं देखा, घर मे भी नहीं था खोजने से नहीं मिला

पापा बोले कि पिल्लू को कोई चुरा ले गया है शायद

1 महीने के बाद पिल्लू एक बड़े से घर मे भौंकते हुए मिला पापा का शक सही निकला था वो लोग हम लोगों के जान पहचान के थे हम लोग चाहते तो पिल्लू को वापस ले आते पर जब हम लोग पिल्लू के पास गए तो पिल्लू ने हम लोगों को नहीं पहचाना

पापा ने कहा कि उसको जाने दो वो तो अच्छी तरह से है ना हम दूसरा कुत्त ले आएंगे वो अपनी किस्मत से वहां रहता है

पिल्लू के लिए उस घर में झूला लगा हुआ था वो खूब अच्छा अच्छा खाना खाता था भैस का दुध पीता था

😔😔😔

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