एक सुख की चाह मे सौ दुख झेलने मिलते हैं

हमे सुख चाहिए और हम उन सुखों को भोगने के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं और उन सुखों को पाने के लिए कितना अधिक परिश्रम और मेहनत करते हैं और कहां कहाँ भागते रहते हैं लेकिन क्या ये हम जानते हैं कि एक सुख मे कितने दुख छिपे हुए है

हमे सुखों की चाह ना करके अपना सामान्य जीवन बिताना चाहिए जो भी हमारे जीवन मे हमारी मेहनत का आएगा वो भी हमारे पास ज्यादा दिन नहीं रुक सकता

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