कातिल निगाहें

किसी की निगाहों को कभी भी गौर से ना देखना ये काजल भरी मदहोश होती हैं इनमे इतनी गहराई होती है कि तुम इनमे डूब कर भी पता ना लगा पाओगे की तुम्हारी तृप्ति कहां छिपी हुई है

इन्हीं आँखों की गहराई मे कितने कत्ल हो गए ,अपनी बर्बादी का रास्ता इन कातिल निगाहों मे ना खोजों

इनमें डूबकर तुम कितने खाली हो गए हो तुम्हारा क्या चला गया तुम जान भी नहीं पाओगे बाद मे खुद को भी नहीं पहचान पाओगे

इनमे डूबकर कुछ पागल हो गए और कुछ पागल होते होते बच गए इनकी गहराई का कोई किनारा नहीं है

जालिम निगाहों से किसी का कत्ल हुआ वो कहा खो गया कोई गोताखोर भी तह तक ना जा सका

“कातिल निगाहें” को एक उत्तर

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