कुछ ख्याल



चलो कुछ ख्वाब फिर सजा लें,
चलो एक नयी दुनिया फिर बसा लें,
किसी ग़म को जगह नही देंगे कभी,
चलो आज मिल कर यह कसम खा लें,

जो धोखे दुनिया दिखा गयी पूरी,
जो लोग ज़रुरत पर बना गए दूरी,
वो शख्स जिसने वक़्त पर बतायी मजबूरी,
इनको ज़हन से याद से नसीब से हटा लें,
चलो कुछ ख्वाब फिर सजा लें….

वो लम्हा जब तनहा थे अकेले थे,
वो शब् जब तुम पर भी पहरे थे,
वो दिन जब वीरान अपनों के चेहरे थे,
आओ की मुस्कुरा कर भुला लें,
चलो कुछ ख्वाब फिर सजा लें..

One response to “कुछ ख्याल”

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें