
अक्सर देखा गया है कि हम खुद से ही परेशान रहते हैं उन लोगों को याद किया करते हैं जो कभी हमारे पास थे उनकी बातें उनका बुरा बर्ताव हमे तंग करते है जबकि वे लोग हमसे दूर चले गए हम जब अकेले होते हैं तो अपना स्वयं का कार्य शुरू ना करके उन लोगों को याद करके बेकार में अपना समय नष्ट करते हैं, जो जा चुके जो हो चुका था उसके बारे मे हमे याद नहीं करना चाहिए
उन लोगों को याद कर कर के हम खुद को तंग करते हैं और दोष उन लोगों को देते हैं जो अब हमारे साथ नहीं है
माना कि उन लोगों के साथ हमारा जीवन बहुत मुश्किल से गुजरा हम बहुत अशांत रहे, हमे उन लोगों ने बहुत परेशान किया लेकिन अब वो सब तो बीत चुका, अब उस बीते हुए समय का कोई अस्तित्व नहीं है तो हम उन्हें बार बार क्यों याद करते हुए अपने आप को दुखी रखते हैं
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