कभी किसी आखिरी साँस लेते हुए इंसान को देखा है वो क्या सोचता है जब उसका आखिरी समय होता है जब उसके पूरे शरीर मे कष्ट होता है जब उसे साँस लेने मे दिक्कत होती है
पूरे शरीर मे उसे दर्द होता है एक एक रोम रोम की नसें चटकते है तब वो इंसान बहुत अफसोस करता है क्योंकि उसने जो धन सम्पत्ति खुद से बचाकर अपने लिए रखी थी अपने ऊपर उसने कितना जुल्म किया था पैसा होते हुए भी उसने अपने मन को कितना मारा था आज उसकी वो अवस्था है कि वो अपने जोड़े हुए पैसे का कोई उपयोग नहीं कर सकता
आखिरी समय मे वो सभी की भावनाओ को भी समझ लेता है भले ही उसे कष्ट होता है अपने बचाए गए पैसे और दौलत का उपयोग अब वो नहीं कर सकता, किसी को वो अब भी देना नहीं चाहता अब वो सोंच रहा है कि उसने इतना पैसा जुगाड़ किया इतनी मेहनत की लेकिन वो अपने जीवन को खुशहाल क्यों ना जी पाया
इसी तरह अभी तुम जिंदा हो अपने जुगाड़ किए गए पैसों को खुद पर खर्च करो अपने लिए ही नहीं दूसरों को खुशिया प्रदान करो और कुछ बचा लो ताकि अंत समय मे तुम्हें कोई अफसोस ना करना पड़े की हाय मैं ठीक से नहीं जिया जीवन भर मैं हाय हाय करता रहा
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