कामिनी की गोद भराई का कार्यक्रम शुरू हो जाता है कामिनी की सास कामिनी को उपहार देती है और फिर वीर सिंह कामिनी को अंगुठी पहनाते है कामिनी भी वीर सिंह को अंगुठी पहना देती है और फिर सब एक दूसरे को प्रणाम करते हैं
अब खाने का समय हो जाता है भाभियों का मजाक भी शुरू हो जाता है मंगल गीत होने लगते हैं घर की महिलाये मंगल गीत गाती है
बड़ी भाभी कामिनी को कमरे मे लेकर जाने लगती हैं तो वीर सिंह की माँ कहती हैं कि रहने दो अभी इसको अब ये हमारी बहू हो चुकी इसको भी हमारे साथ खाना खाने दो
लेकिन भाभी कहती हैं कि अब ये आपकी ही है लेकिन यहा पर बड़े लोग है उनके सामने ये कैसे खड़ी रह सकती है इसे ले जाने दीजिए माता जी क्रमशः

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