शादी का असली मतलब 275

रिकी कहती है कि तुम रघु को माफ़ नहीं कर सकती तो ना सही लेकिन उसे दुखी मत करो अपने आपको भी दुखी मत करो मैं जानती हू की तुम्हारे साथ क्या बीती है

रूपा कहती है कि दीदी आपको नहीं एहसास है कि किस तरह मैंने एक एक रात अकेले यहां काटी है रघु और मेडम अपने कमरे मे हंसते थे और मैं कितनी अकेली इस कमरे मे पडी रहती थी

मेरा बनाए हुए खाने को रघु लात मारकर फेंक देते थे मुझसे कितनी नफरत करते थे मम्मी जी ने मुझे रखा था आज मैं उन्हीं के रहमोकरम पर इस घर मे हू

परंतु मैं ज्यादा दिन इस घर में नहीं रहूंगी मैंने बहुत जल्दी ही यहा से जाने का फैसला कर लिया है मैं अब चली जाऊँगी

रही बात मेरी और पापा जी की की हम लोग रात मे एक कमरे मे रहते थे रात भर हम और पापा जी क्यों रहते थे इसका भी भेद खुलेगा

और मैं करवा चौथ का व्रत क्यों करती हू क्योंकि मैं जिसकी ब्याहता हू जिसके घर मे रहती हूँ वो मुझे पसंद करे या ना करें लेकिन मैं उनकी कुशलता के लिए भगवान से प्रार्थना करती ही रहूंगी

और दीदी मुझे आपसे बहुत स्नेह मिला है। क्रमशः

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