एक दिन शेष रह जाता है जब जीवन

लेकिन एक दिन शेष रह गए हम लोग इस बात पर निर्भर न रहे

एक दिन एक आदमी बहुत बीमार था उससे वैध ने कहा कि तुम्हारी जिंदगी का एक दिन शेष है तुम्हें जो करना है जल्दी कर डालो कल तुम्हारी कभी भी मृत्यु हो सकती है तुम परसों का दिन नहीं देख पाओगे

वो आदमी कुछ दिन और जीना चाहता था वो सोचता था कि वो सारी जिंदगी तो मेहनत करता रहा अपने परिवार के लिए, बच्चों को पढ़ाया लिखाया, बच्चे अपने अपने काम मे लग गए पत्नी भी मुझे प्यार करती है बच्चे भी मुझे प्यार करते हैं

क्या वे लोग मेरे जाने का दुख सह पाएंगे मेरे बच्चे भी बहुत दुखी है मेरे मरने की बात सुनकर

वैध ने कहा कि कोई कितना दुखी है मैं तुम्हें एक औषधि पीला देता हू तुम इनके मन की बात जान जाओगे और तुम्हें भी अपने मरने का डर नहीं रहेगा

ये तुम्हारा कमरा है ये तुम्हारा घर है जिसे तुमने कितनी मेहनत से बनाए थे आज ये सब यहीं छूट जाएगा तुम अपने परिवार का मोह त्याग दो वही अच्छा है

अब वो औषधि उस आदमी ने पी ली और उसे थोड़ी सी शक्ति मिली तो उसने सोंचा की चलो थोड़ी देर बाहर घूम लिया जाए

तो बाहर जाकर देखता है कि एक बास की खटिया ओये सफेद कपड़ा और एक रस्सी एक तरफ पडी हुई है उसके बेटे अपने अपने कमरे मे सोए हुए है उसके बेटे नहीं जानते थे कि उनके पिता थोड़ा थोड़ा चलने लगे हैं

वे अपने कमरे मे बात कर रहे थे कि कल वो दिन आ जाएगा जब पिता जी स्वर्ग सिधार जाएंगे उन्होंने वसीयत हम लोगों के नाम कर दी है उन्होंने कभी माँ को कुछ समझा ही नहीं ,परसों से तो सबकुछ हम लोगों का हो जाएगा

माँ का क्या है हम लोग पिताजी के कमरे को अपनी दुकान बना लेंगे और माँ को जहां गाय बांधी जाती है वहां पर रख देंगे एक दिन तुम खाना देना एक दिन हम लोग उनको खाना देंगे

सारी वस्तुएं हम लोग आपस मे बांट लेंगे, माँ क्या करेगी, खेत बाग तो सब हम लोगों के नाम हो जाएगा अब पिताजी ने तो माँ को कुछ दिया नहीं और ना वो कुछ देना चाहते है उन्हें वो तो एक नौकर की तरह घर मे थी

अब भी नौकर की तरह रहेंगी हमारे काम करेंगी और हमारे घर मे रहेंगी सोने के लिए गाय का कमरे मे सो जाएंगी

गाय हम लोग बेंच देंगे, मैंने तो उनको श्मशान ले जाने का बंदोबस्त भी कर लिया है अभी से ही सारा सामान ला दिया है

वो आदमी बहुत आश्चर्य चकित हो गया कि ये सब प्रेम का दिखावे करते थे

अब वो अपनी पत्नी को देख रहा था वो अकेली बैठी हुई थी और उदास थी उसने अपनी पत्नी को देखकर मन मे विचार किया और उसके मन को पढ़ने लगा उसे बहुत आश्चर्य हुआ अब वो वहां से लौट आया उसने देखा कि वैध जी कमरे मे खड़े है और साथ मे वकील भी खड़ा है

वैध जी ने कहा कि क्या बात है कुछ आंखे खुली क्या विचार हैं

उस आदमी ने कहा कि मुझे अपनी वसीयत बदलनी है अपनी पत्नी के नाम करनी है

वकील ने कहा कि मैं वैध जी के कथनानुसार सबकुछ लिख कर लाया हू आप इसमे हस्ताक्षर कर दो और पढ़ लो

उस आदमी ने कहा कि आप पर तो मुझे पूरा भरोसा है वकील ने कहा कि यही तो तुम्हारी कमजोरी है तुम इसे पढ़ लो उस आदमी ने पढ़ा और उसमे अपने हस्ताक्षर कर दिए

वकील चला गया अब वैध जी ने कहा कि ये तुम्हारी दूसरी पत्नी है ये सारे बच्चे तुम्हारी पहली पत्नी से थे, तुमनें कभी दूसरी पत्नी को पत्नी का दर्जा नहीं दिया और उसका तिरस्कृत करते रहे और वो तुम सभी की सेवा करती रही अगर वो बेसहारा हो जाती तो तुम्हें मरने के बाद भी शांति नहीं मिलती

उस आदमी को अपनी भूल का पश्चाताप हुआ और उसने अपनी पत्नी से माफी मांगी और वो निश्चिंत हो गया

पत्नी उसके सिरहाने बैठी थी उसके सिर मे अपना हाथ फ़ेर रही थी कह रही थी कि मैं भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि आपकी जिंदगी लंबी हो आप कुछ दिन और जी ले आपने बहुत मेहनत की है

वो आदमी बोला क्या तुमने मुझे माफ़ कर दिया मैंने सबकुछ तुम्हारे नाम कर दिया है मैं ना रहूंगा तो तुम अपने मायके चली जाना पत्नी ने कहा कि ये नहीं हो सकता आपको कुछ नहीं होगा

अब दूसरे दिन लड़के बहू रोते हुए आते हैं और अपने पिता के पास खड़े हो जाते हैं कहते है कि हम लोग आपकी सेवा करेंगे कल आप नहीं रहोगे हम लोग कैसे जिएंगे आपके बिना

वो आदमी कुछ ना बोला

अब सब लड़के बहू उसकी आखें देख रहे उसका मुह देख रहे वैध जी से बार बार पूंछ रहे की अभी कितनी देर है

जब वो आदमी रात मे नहीं मरा तो वैध जी ने कहा कि तुम अभी और जी लो

वैध जी ने कहा कि मैं स्वांग कर रहा था तुम्हें अभी कुछ नहीं होगा तुम्हारी आँखों का पर्दा अब उठ गया है इसलिए भगवान ने तुम्हें कुछ दिन का जीवन उपहार मे दिया है

उस आदमी ने वैध जी का बहुत धन्यवाद दिया।

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