दीपेन्द्र पागलों की तरह चीत्कार कर रहा था उसके मुह से झाग निकलने लगा उसकी आंखे भेड़िया की तरह लाल हो गई थी और वो सबको झटके से गिरा कर मार रहा था
तभी एक आदमी पीछे से उठकर उसे लोहे के डंडा से मारने ही जा रहा था तभी दीपेन्द्र ने उसे देख लिया और झपट कर डंडा छीन लिया और उसको जमीन मे पटक कर लगातार प्रहार करने लगा उस आदमी का सर फ़ट गया था अब तो वो शायद मर भी गया था दीपेन्द्र ने उसे उठाया और बहुत दूर फेंक दिया था
उसको इस रूप में देखकर लड़की भी डर गई और वो एक कब्र के पास छिप गई
तीन आदमियों का दीपेन्द्र ने काम तमाम कर दिया था और अब दो आदमी थे वो अपनी जान बचाकर भागने लगे तभी दीपेन्द्र ने उन्हें भी देख लिया दीपेन्द्र को रात मे भी दिखने लगता था उसको आज फिर दौरा पड़ा था
दीपेन्द्र एक मानसिक रोगी था वो किसी वही गलत चीज को बर्दाश्त नहीं कर पाता था
क्रमश

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